Tuesday, January 11, 2022

कर्म क्या है ? - आदमी को कैसे कर्म करने चाहिए? ( गौतम बुद्ध की कहानियाँ )

By:   Last Updated:

 कर्म क्या है ? एक बार गौतम बुद्ध से उनके एक शिष्य ने पूछा, तथागर कृपया कर हमें बताइए कि कर्म क्या है तब गौतम बुद्ध ने शिष्य से कहा, कर्म को समझाने के लिए मैं तुम्हें एक कहानी सुनाता हूं। इस कहानी तो तुम समझ जाओगे कि कर्म क्या है।


गौतम बुद्ध की कहानि ( कर्म के बारे में ) 

 गौतम बुद्ध ने कहानी सुनानी शुरू की है कि बुलंदशहर में एक राजा राज्य करता था। 1 दिन वो अपने घोड़े में बैठकर अपने राज्य का चक्कर लगा रहा था। चारों तरफ घूमने के बाद वह दुकान के सामने जाकर रुक गया। रुकने के बाद राजा ने अपने मंत्री से कहा कि महामंत्री पता नहीं क्यों पर मुझे लगता है कि इस दुकान के मालिक हो कल के कल फांसी की सजा सुना दो। इसे मृत्युदंड देने का मेरा मन कर रहा है। मंत्री मृत्युदंड देने का कारण राजा से पूछता कि राजा वहां से आगे निकल गए। 

इस बात का पता लगाने के लिए मंत्री अगले दिन। भेष बदलकर एक आम आदमी का रूप धारण कर उस दुकान में जा पहुंचे। वैसे वह दुकानदार चंदन की लकड़ी बेचने का काम करता था। मंत्री  ने दुकानदार से पूछा कि भाई तुम्हारा काम कैसा चल रहा है तब दुकानदार ने बताया कि उसका बहुत ही बुरा हाल है। लोग उसके दुकान पर आते तो है और उसकी चंदन की लकड़ियों को सूंघ कर ओर उसकी प्रशंसा बहुत  करते हैं। लेकिन खरीदा कोई नहीं है। 

उसने मुख्यमंत्री को आगे यह भी बताया कि मैं बस इसी बात के इंतजार में हूं कि कब हमारे राज्य के राजा की मृत्यु हो जाए और उनके अंतिम संस्कार के लिए उससे बहुत सारी चंदन की लकड़ियां खरीदी जाए। शायद उसके बाद से मेरे व्यापार में और ज्यादा बढ़ोतरी आ जाएगी और मेरा व्यापार अच्छे से चलने लगेगा।

 यह सुनने के बाद मंत्री को सारी बात समझ आ गई। वह समझ गया कि यही वो  नकारात्मक विचार है जिसने राजा के विचारों को भी नकारात्मक बना दिया है। जब राजा की दुकान के सामने से गुजर रहे थे और उन्होंने इस दुकानदार को देखा तो इस दुकानदार की नकारात्मक सोच की उर्जा ने राजा को भी नकारात्मक तरीके से प्रभावित किया जिसकी वजह से राजा के दिमाग में उसे मृत्युदंड देने का विचार आया। वह मंत्री बहुत ही बुद्धिमान था। इसलिए उसने सोचा कि मैं इससे थोड़ा बहुत चंदन की लकड़ी आखरी देता हूं। इसलिए दुकानदार से पूछा, क्या मैं आपसे थोड़ी सी चंदन की लकड़ी खरीद सकता हूं। 

यह सुनकर वह दुकानदार बहुत ही खुश हो गया। उसे सोचा चलो। कुछ बिका इतने दिनों से कोई इन लकड़ियों को खरीदनी ही नहीं रहा था। उस दुकानदार ने चंदन की लकड़ी को अच्छी तरीके से कागज में लपेटा और लपेटकर मंत्री को दे दिया। 

अगली सुबह मंत्री उन चंदन की लकड़ी को लेकर राजा के दरबार में पहुंच गया और उनसे कहा, महाराज उस दुकानदार ने जिसे आप कल मृत्यु दंड देना चाहते थे। आपके लिए उपहार स्वरूप ये चंदन की लकड़ी भेजी है। यह सुनते ही राजा बहुत ही खुश हुई और मन ही मन सोचने लगे कि मैं बेकार में ही  उस दुकानदार के बारे में गलत सोचने लगा था। 

राजा ने चंदन की लकड़ी को हाथ में लिया। उसे सूंघा उसमें से बहुत ही अच्छी सुगंध आ रही थी। राजा इससे  बहुत ज्यादा प्रसन्न हुए। उन्होंने मंत्री से कहा, मेरी तरफ से उस दुकानदार को इस उपहार के बदले 5 सोने के सिक्के प्रदान किए जाएंगे। 

अगले सुबह मंत्री फिर उसी आम आदमी का रूप धारण करके सोने के सिक्के सहित उस दुकानदार के पास जा पहुंचा और उसे यह बताते हुए कि तुम्हारी चंदन की लकड़ी महाराज को बहुत ज्यादा पसंद आई है। उसे वह 5 सोने के सिक्के दे दिए। इसके बाद उस दुकानदार को खुद की सोच पर बहुत पछतावा पछतावा होने लगा। उसने सोचा कि मैं राजा के बारे में कितनी  गलत बातें सोचता था। पर राजा तो बड़ी ही दयालु है और यहीं पर गौतम बुद्ध ने इस कहानी को खत्म कर दिया। कहानी खत्म करने के बाद बुधनी अपने शिष्यों से पूछा अब आप लोग मुझे बताइए कि कर्म क्या होता है। शिशुओं ने उत्तर देते हुए कहा कि हमारी स्व ही हमारी कर्म है। 

कर्म क्या है ? what is karma

हम जो काम करते हैं, वही हमारे कर्म है। हमारी जो भावनाएं हैं, वही हमारे कर्म है। गौतम बुद्ध ने सभी शिक्षकों के जवाब सुनने के बाद यह कहा, आपके विचार ही  आपके कर्म है क्योंकि आप जो विचार करते हैं। असल जिंदगी में आप वही काम करते हैं। अगर आपने अपने विचारों पर नियंत्रण करना सीख लिया तो आप एक महान इंसान बन जाते हैं। जब आप अच्छा सोचते हैं तो आपके साथ अच्छा ही होता है और वह होता ही रहेगा। इसलिए मैं भी कहना चाहूंगा। दोस्तों अगर आप अच्छा सोचोगे तो दूसरे  भी आपके बारे में अच्छा सोचने लग जाएंगे। 

दोस्तों अगर आप गौतम बुद्ध की और भी ऐसे कहानियां सुनना चाहते हैं या फिर उनके ऊपर लिखे गए कोई बुक पढ़ना चाहते हैं तो अभी सारे बुक जोड़ी सुन सकते हैं KuKU FM पर यह एक बहुत ही अच्छा app है जिसमें पहली audio Book ( BEING TO BECOMING BUDDHA

तो दोस्तों आज आपने जान गया होगा कि कर्म क्या है ? मनुष्य का कर्म क्या है उम्मीद करता हूँ कहानियां आपको पसन्द आया होगा और कर्म से जुड़ी सारे बातें आपने जान गया होगा । 

मनुष्य का कर्म क्या है

कर्म क्या है कर्म का सिद्धांत

गीता के अनुसार कर्म क्या है

शुभ कर्म क्या है

ऐच्छिक कर्म क्या है

निष्काम कर्म क्या है

कर्ता और कर्म किसे कहते हैं

कर्म की विशेषताएं

No comments:
Write comment